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Wednesday, 12 September 2018

Bhagat Singh Biography in Hindi | क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की जीवनी

bhagat singh biography in hindi
शहीद भगत सिंह का नाम भारत के क्रांतिकारियों की पंक्ति में गिना जाता है। शायद ही कोई होगा जो भगत सिंह वीरता के बारे में नही जानता हो। भगत सिंह ने अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजों से लोहा लिया और भारत को आज़ाद कराने के लिए हर तरह से अपना योगदान देते रहे। यही वजह है कि आज हर इंसान शहीद भगत सिंह को नमन करता है।

शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय -


पूरा नाम - भगत सिंह
जन्म - 28 सितम्बर 1907
मृत्यु - 23 मार्च 1931
जन्मस्थान - गाँव बंगा, जिला लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान में)
मृत्युस्थान - लाहौर जेल, पंजाब (अब पाकिस्तान में)
आंदोलन - भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम
संगठन - नौजवान भारत सभा, हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन

भगत सिंह की जीवनी (Bhagat Singh Biography in Hindi) -


भगत सिंह भारत के भविष्य के लिए सुनिश्चित विचारधारा भी रखते थे यही कारण है कि इन्होंने भारत के अनगिनत युवाओं ओर किशोरों को अपने साथ क्राँति में उतारा था।

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स्वतन्त्रता सेनानी सरदार किशन सिंह के सुपुत्र ओर प्रसिद्ध क्रांतिकारी अजीत सिंह के भतीजे शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिला के एक गाँव बंगा में हुआ जो कि अब पाकिस्तान में है।
आपको बता दे यह बड़े संयोग की बात है कि जिस क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्म हुआ उसी दिन उनके पिता सरदार किशन सिंह और उनके छोटे चाचा सरदार स्वर्ण सिंह जेल से छूटे थे और उनके बड़े चाचा अजीत सिंह के निर्वासन समाप्त होने की सूचना भी मिली थी। इसीलिए भगत सिंह की दादी ने उन्हें प्यार से 'भगोवाला' (भाग्यवान) ओर इसी तरह नाम रख दिया गया भगत सिंह जो आगे चलकर अंग्रेजों को धूल चटाने वाले महान क्रांतिकारी बने।
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एक दिन ढाई-तीन साल के नन्हे भगत सिंह अपने पिता के साथ खेत जाकर तिनके रोपने लगे। तो उनके पिता ने पूछा क्या कर रहे हो ? तभी भगत सिंह ने जवाब दिया 'बंदूके बो रहा हूँ जब बड़ा हो जाऊँगा तो इस खेत से ही बहुत सारी बंदूके मिल जाएगी' । सभी हँसे लेकिन नन्हे से भगत सिंह की यह छोटी सी घटना में ही भगत सिंह का सही भविष्य छिपा हुआ था।
भगत सिंह ने बच्चपन में अपने परिवार से देशभक्ति, राष्ट्रीयता, ओर रुधि-विरोधी आर्यसमाज के संस्कार पाए। जब भगत सिंह नेशनल कॉलेज में पहुंचे तो इनका भगवती चरण वोहरा, सुखदेव ओर यशपाल आदि से परिचय हुआ। भगवती चरण वोहरा के पिता बड़ी जायदाद छोड़ गये थे और यह पैसा इन सभी क्रांतिकारी साथियो के काम आ रहा था इसलिए दुर्गा भाभी सभी की भाभी बन गयी। भाभी के साथ आकर रहने वाली सुशीला सभी की दीदी बनी और इनका घर सभी क्रान्तिकारियो का घर बन गया।

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जब भगत सिंह ने एम.ए पास कर ली तो घर में शादी की बातें होने लगी शादी से बचने के लिए भगत सिंह घर से भाग निकले। भगत सिंह ने घर से भागने के बाद पहले दिल्ली आकर बलवंत सिंह नाम से 'अर्जुन' पत्र के संवाददाता के रूप में काम किया फिर कानपुर जाकर गणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र 'प्रताप' में भी बलवंत सिंह नाम से लिखना शुरू कर दिया। इसी के साथ-साथ भगत सिंह क्रांति कार्य भी चला रहे थे। दरअसल इस तरह से क्रांतिकारी भगत सिंह इस गुप्त आंदोलन को जनआंदोलन बनाना चाहते थे।

भगत सिंह के निरंतर सात वर्षीय सक्रियता ही जनता के साथ जुड़ने की बड़ी वजह थी, ओर भगत सिंह लोगों को जोड़ने के लिए अपनी लेखनी का भरपूर उपयोग कर रहे थे। धीरे-धीरे वे प्रताप के अलावा 'चाँद' और 'कीर्ति' में भी लिखने लगे थे। कानपुर में उनके रहने का पता घरवालों को चलने पर उन्होंने दादी के बीमार होने का बहाना बनाकर भगत सिंह को घर बुलवा लिया। तब उनकी माँ विद्यावती ने कहा 'इसकी शादी जबरदस्ती मत करो। अगर देश सेवा करने की मर्जी है तो इसे वही करने दो। यही गुरु महाराज की इच्छा है तो हम कौन होते है इसमें बाधा डालने वाले !' इन्ही विद्यावती को बाद में पंजाब सरकार की ओर से 'पंजाब माता' का ख़िताब देकर सम्मानित किया गया।

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भगत सिंह हिंदी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी और उर्दू के भी अच्छे जानकार थे। भगत सिंह इतने अध्ययनशील और विचारक थे कि छोटी उम्र में ही सबको प्रभावित कर देते थे। लायलपुर में दिए गये व्याख्यान में जब उन्होंने 'तेंगर्ड हत्याकांड' से जुड़े गोपीमोहन साहा की तारीफ़ कर दी तो पकड़ लिए गये। उनपर मुकदमा भी चलाया गया लेकिन प्रमाण के अभाव में वो छूट गए और मुकदमा आगे नही बढ़ पाया। सन 1926 में दशहरे पर एक जगह बम फटने को लेकर भी भगत सिंह पर मुकदमा चलाया गया था पर कुछ दिन जेल में अत्याचार सहकर वे अदालत से छुट गये।

उन्होंने इसके बाद पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार के क्रांतिकारी संघठनो को जोड़ने के लिए एक सभा बुलाई जिसमे चंद्रशेखर आजाद , सुखदेव , शिव वर्मा , कुंदनलाल , कमलनाथ तिवारी , फणीन्द्र घोष , यशपाल , जयगोपाल आदि और उनके सभी साथी इकट्ठे हुए। उस समय के बम्ब बनाने में माहिर यतीन्द्र दास भी कलकत्ता से आकर इस सभा मे शामिल हुए।
चंद्रशेखर आजाद इस दल के सेनापति चुने गये और पूर्व संघठन 'भारत नौजवान सभा' का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी' कर दिया गया।

इस संघठन के सभी सदस्यों ने 'काकोरी कांड' के कैदियों को हवालात से छुड़ाने की योजना बनाई पर वो इसमें असफल रहे। तभी अचानक से देश मे एक ऐसी घटना की पंजाब के दल को एक्शन लेना पड़ा। सन 1928 में संविधान संशोधन का कार्यक्रम लेकर ब्रिटेन से साइमन कमीशन भारत आया था। जिसके सभी सदस्य अंग्रेज थे और कमीशन की कार्यप्रणाली भी भारत को स्वीकार्य नही थी अत: देश में जहा जहा साइमन कमीशन गया , काले झंडो के साथ प्रदर्शन करके 'साइमन वापस लौट जाओ' के नारों के साथ उसका बहिस्कार किया गया।

23 अक्टूबर 1928 को लाहौर में ऐसे ही एक बायकाट जुलुस पर लाठी चार्ज में पंजाब के वरिष्ट नेता लाला लाजपत राय घायल हो गये थे और कुछ दिन बाद 29 नवम्बर को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गयी थी। इसके बाद 15 दिसम्बर को लाहौर में हुआ प्रसिद्ध सांडर्स वध कांड पंजाब के नेता लाला लाजपत राय की मौत का बदला ही था। जिसके लिए भगत सिंह को फरार होकर कलकत्ता में जीवन बिताना पड़ा। उसके बाद केंद्रीय असेंबली में बम्ब फेका जिसके अंग्रेजी अफसर मारे गए। उसके बाद भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को गिरफ्तार कर लिया गया।
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भगतसिंह को उनके दो साथियो सुखदेव और राजगुरु के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी दिए जाने का समय तय हो जाने पर भी सरकार ने किस तरह क्रुद्ध जन सैलाब उमड़ने के भय से फाँसी के घोषित समय से पूर्व ही रात को चुपचाप तीनो को फांसी दे दी थी।

शहीद भगत सिंह के कुछ Quotes -


वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, लेकिन वे मेरी आत्मा को कुचलने में समर्थ नहीं होंगे। - भगत सिंह
मैं एक इंसान हूं और मानव जाति से प्रभावित होने  वाले  सभी लोग मुझसे जुड़े  हुए है। - भगत सिंह
लोग आम तौर पर चीजों की स्थापना के क्रम में आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार पर कांपना शुरू कर देते हैं। यही  वह सुस्त  भावना  है  जिसे  हमे  क्रांतिकारी  भावना  से  बदलना होगा । - भगत सिंह
राख  का हर एक छोटे से छोटा अणु भी मेरी गर्मी के साथ गति में है, मैं तो ऐसा पागल हूँ की मैं जेल में भी आज़ाद हूँ। - भगत सिंह
हमारे लिए, समझौता का मतलब कभी आत्मसमर्पण नहीं होता है, केवल एक कदम आगे और कुछ आराम  बस इतना ही। - भगत सिंह

कैसी लगी आपको शहीद भगत सिंह की बायोग्राफी हमें कमेंट में जरूर बताएं।

Saturday, 8 September 2018

Akshay Kumar Biography in hindi | अक्षय कुमार की जीवनी

अक्षय कुमार नाम ही काफी है। अक्षय कुमार जो कि बॉलीवुड के बॉस है। अक्षय कुमार का असली नाम राजीव हरि ओम भाटिया है। अक्षय कुमार मशहूर फिल्म अभिनेता होने के साथ साथ निर्माता और मार्शल आर्ट में भी पारंगत है। प्यार से लोग अक्षय कुमार को 'अक्की' नाम से बुलाते है।
अक्षय कुमार ने 125 से अधिक फिल्मों में काम किया है। अक्षय कुमार को कई बार उनकी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवार्डस में नामांकित किया गया है जिसमें से दो बार उन्होंने यह पुरस्कार जीता भी हैै। हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में अक्षय कुमार लंबे समय से काम कर रहे है। अक्षय कुमार अपने अनुशासित स्वभाव और दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं। ‘खिलाडि़यों के खिलाड़ी’ नाम से मशहूर अक्षय अपनी फिल्मों में ज्यादातर स्टंट स्वयं ही करते है। अक्षय कुमार बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में से एक है जो फ़िल्म के लिए स्टंट खुद करते है।

■ Bhagat Singh Biography In Hindi | क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की जीवनी


अक्षय कुमार का परिचय -


पूरा नाम - राजीव हरि ओम भाटिया
जन्म - 1 सितम्बर 1967 (अमृतसर, पंजाब, भारत)
माता - अरुणा भाटिया
पिता - हरि ओम भाटिया (मिलेटरी ऑफिसर)
बहन - अलका भाटिया
पत्नी - ट्विंकल खन्ना
प्रोफेशन - एक्टिंग
ऊँचाई - 5फ़ीट 11इंच


अक्षय कुमार का नीजी जीवन -


बॉलीवुड में रहने के दौरान, अक्षय कुमार का नाम उनके साथ काम करने वाली कई अभिनेत्रियों के साथ जोड़ा गया जैसे रवीना टंडन, रेखा और शिल्पा शेट्टी। जाने माने कलाकार राजेश खन्ना और डिम्पल कपाड़िया की बेटी ट्विंकल खन्ना से दो बार सगाई होने के बाद अंत में उन्होंने 14 जनवरी 2001 में ट्विंकल खन्ना से शादी कर ली। उनके बेटे का नाम आरव है जिसने 15 सितम्बर 2002 में जन्म लिया।

■ Punjabi Director Parmish Verma Biography In Hindi | परमिश वर्मा की जीवनी

वर्ष 2007 में, मुंबई के एक जाने-माने टेबलोयद समाचार पत्र ने एक ख़बर छापी कि अक्षय कुमार की पत्नी उन्हें छोड़ कर चली गई है और वे घर से बाहर एक होटल में रह रहे है। लेकिन 26 जुलाई को अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना ने टेबलोयद को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें यह बताया गया कि यह अफवाह झूठी थी।

अक्षय कुमार का कैरियर -


अक्षय कुमार की स्कूली पढ़ाई डाॅन बोस्को स्कूल में हुई है और आगे की पढ़ाई मुबंई के गुरू नानक खालसा काॅलेज से हुई है। 
भारत में ताइकक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल करने के बाद अक्षय ने थाईलैंड के बैंकाॅक में मार्शल आर्ट्स की पढ़ाई की। वहां से वापस लौटने के बाद अक्षय कुमार ने अपना फोटोशूट कराया जिसके बाद उन्हें फिल्म 'दीदार' के लिए साइन किया गया।

मुख्य अभिनेता के तौर पर अक्षय के करियर की शुरूआत ‘सौगंध’ फिल्म से हुई। इसके पहले भी मार्शल आर्टस के प्रशिक्षक के रोल में उन्हें ‘आज’ फिल्म में मौका मिला लेकिन उसमें उनकी बिना श्रेय भूमिका थी। शुरूआती दौर में उनकी फिल्मों को खास प्रतिक्रिया नहीं मिली लेकिन उनकी खिलाड़ी सीरीज की फिल्मों ने उन्हें बाॅलीवुड का ‘खिलाड़ी कुमार’ बना दिया।

अक्षय कुमार से जुडी रोचक बातें -


1. अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है।  वह आर्मी अफसर हरिओम भाटिया के बेटे हैं।  अक्षय कुमार के होम प्रोडक्शन का नाम भी उनके पिता के नाम पर है- हरी ओम प्रोडक्शंस।
2. अक्षय को बचपन से ही मार्शल आर्ट्स और तायकांडो का शौक था।  वह तायकांडो में ब्लैक बेल्ट से सम्मानित भी किये जा चुकें हैं। उन्होंने बैंगकॉक में मुए थाई भी सीखा है।
3. अक्षय कुमार फिल्म अभिनेता बनने से पहले बैंगकॉक में वेटर और कुक का काम करते थे।
4. अक्षय कुमार हिंदी सिनेमा का जाना-माना नाम हैं, लेकिन वह इसका शो ऑफ़ कभी भी पब्लिकली नहीं करते, वो यही चीज अपने बच्चो को बताते हैं। इतना ही नहीं जब उन्होंने अपनी बेटी नितारा का एडमिशन प्ले स्कूल में कराया था। तो आम मां-बाप की तरह उन्होंने भी लाइन में लगकर अपनी बारी की प्रतीक्षा थी।

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5. अक्षय कुमार के पास पैसे की कमी नहीं है लेकिन वह महीने में सिर्फ पांच से दस हज़ार ही खर्च करते हैं।
6. अक्षय कुमार शाम 7 बजे से पहले अपना डिनर करते हैं।  उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, कि 7 बजे के आपकी शरीर कैलोरी को बर्न नहीं करती।  मैं सुबह भी जल्दी उठता हूँ ताकि अपने रूटीन को फॉलो कर सकूँ।
7. अक्षय कुमार नें अपने फ़िल्मी करियर में करीबन आठ फिल्मों में विजय और सात फिल्मों में राज का किरदार निभाया है।
8. कलर्स शो खतरों के खिलाडी होस्ट करने के अलावा वह नेशनल जियोग्राफिक चैनल के लिए मार्शल आर्ट्स डॉक्यूमेंट्री  'सेवन डेडली आर्ट्स विद अक्षय कुमार भी होस्ट कर चुके हैं।
9. हिंदी सिनेमा में अक्षय का दूसरा नाम एक्शन खिलाडी है उसके पीछे भी एक कारण हैं।  दरअसल हिंदी सिनेमा में अक्षय ने करीबन आठ फ़िल्में की हैं जो खिलाडी नाम से हैं। खिलाडी, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, खिलाडियों का खिलाडी, इंटरनेशनल खिलाडी, सबसे बड़ा खिलाडी, मिस्टर एंड मिसेज खिलाडी, खिलाडी 420, खिलाडी 786।
10. एक्शन खिलाडी की तरह अक्षय कुमार ने हिंदी सिनेमा की कई फिल्मों में पुलिस अफसर की भूमिका अदा की है। कायदा कानून, मोहरा,  मैं खिलाडी तू अनाड़ी, पांडव, सबसे बड़ा खिलाडी, तू चोर मैं सिपाही, इंसाफ, दावा, तराजू, अंगारे, मेरी बीवी का जवाब नहीं, खाकी, पुलिस फ़ोर्स, आन-मेन ऐट वर्क, राउडी राठौर। 

दोस्तों कैसी लगी आपको अक्षय कुमार की बायोग्राफी, हमे कमेंट में जरूर बताएं। अगर पसन्द आये तो ब्लॉग को सब्सक्राइब ओर इस पोस्ट को शेयर जरूर करे।

Tuesday, 4 September 2018

Punjabi Director Parmish Verma biography in hindi | परमिश वर्मा की जीवनी

शायद ही ये बताने की जरूरत है की परमीश वर्मा कौन है ? मैं आपको  वर्मा के बारे में बताता हूँ। आज की युवा पीढ़ी परमीश वर्मा को अपना हीरो मानती है। बहुत से लोग परमिश वर्मा को फॉलो करते है।

परमिश वर्मा एक बहुत प्रसिद्ध पंजाबी गायक है। परमिश वर्मा गाने बहुत से लोग पसंद करते है। परमिश वर्मा के गाने उन लोगो द्वारा भी पसन्द किये जाते है जिन्हें पंजाबी बिल्कुल भी नही आती।

परमिश वर्मा पंजाब में सर्वश्रेष्ठ और सफल गायक है। परमिश वर्मा ने अपनी स्क्रीन पर पहली फिल्म 'पंजाब बोलदा' (2011) और उनकी गायन की पहली फिल्म 'ले चक मैं आ गया' (2017) की भूमिका निभाई। उन्होंने 2015 में निर्देशक और मॉडल की शुरुआत 'ठोकादा रिहा' की।

■ Bhagat Singh Biography In Hindi | क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की जीवनी

सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में अपने शुरुआती दिनों के दौरान, वह पब में बर्तन धोते थे, धीरे-धीरे वह एक बारटेंडर बन गये और बाद में उस पब के प्रबंधक के रूप में कार्य किया। उन्होंने फिटनेस फर्स्ट जिम में भी काम किया है।
परमिश वर्मा फिट दिखना चाहते हैं, यही वजह है कि वह जिम में जाते है। परमिश एक टैटू प्रेमी भी है, वह टैटू काफी पसंद करते हैं। परमिश वर्मा के गाने इतने मशहूर हो चुके हैं की बच्चे बच्चे के मुंह पे उनके गाने है।
दरअसल परमीश वर्मा भी हमारी तरह एक आम इंसान हैं परमीश वर्मा ने अपने जीवन में कुछ ऐसे मोड़ भी देखे हैं जो काफी अलग थे जिसके चलते आज वो इतने बड़े स्टार है।
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Image from Instagram.com

Parmish Verma का परिचय -


पूरा नाम - परमीश वर्मा
निक नाम - पारू
माता - परमजीत कौर
पिता - डॉ. सतीश कुमार (लेखक, प्रोफेसर)
भाई - सुखां वर्मा (छोटा भाई) और शैरी राणा
जन्म दिनाक - 03-07-1986
जन्म स्थान - पटियाला, पंजाब (इंडिया)
प्रोफेशन - म्यूजिक निर्देशक, फिल्म अभिनेता, फिल्म निर्देशक, आर्टिस्ट, गायक और मॉडल
वजन - 75Kg
लंबाई - 5फुट 8इंच
रुचि - जिम करना, गानों और कविताओं को कम्पोज करना।

परमीश वर्मा की शादी अभी नहीं हुई है लेकिन कुछ समय के बाद उनकी शादी की संभावनाएं है और कहा जा रहा है की अभी उनकी शादी में बहुत समय है।

■ Akshay Kumar Biography In Hindi | अक्षय कुमार की जीवनी

परमीश वर्मा की गर्ल फ्रेंड -


ये बात कहना बेहद मुश्किल है की इतनी बड़ी ह्श्ती होने के बाद परमीश वर्मा की कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है, जी हाँ हमारी सुचना के तहत तो यही कहा जा रहा है की परमीश वर्मा की गर्ल फ्रेंड नहीं है वो अपने दोस्तों आदि में रहना ज्यादा पसंद करते है।

परमिश वर्मा की कहानी -


परमिश वर्मा का जन्म 03-07-1986 में पटियाला पंजाब में हुआ है। परमिश वर्मा ने अपनी स्कूल शिक्षा यादविंद्र पब्लिक स्कूल, बाद में परमिश वर्मा ने हायर एजुकेशन और एक होटल मैनेजमेंट के कोर्स को ज्वाइन कर लिया और कुछ समय बाद उन्हें वहां अच्छा नहीं लगा।

वहां के हवा पानी में इतना दम नहीं था जो की भारत में है। ऐसा सोच कर परमिश वर्मा भारत वापस आ गए और अपना फ़िल्मी और गायक के कैरियर में ध्यान देने लगे उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपनी पढाई को आधा छोड़ दिया था।

■ 100+ दीपावली शुभकामना शायरी। हैप्पी दीवाली शायरी। दीवाली शायरी 2018 । Deepawali Shayari 2018

परमिश वर्मा की पहली फिल्म 'पंजाब बोल्दा' है जो की 2011 में बनाई गयी। परमिश वर्मा ने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है जिसका नाम 'Parmish Verma Films' है। अपनी प्रोडक्शन के दम पे उन्होंने पंजाबी फिल्मो में पंजाबी सिंगर्स को काम दिया।

परमिश वर्मा की निर्देशित आदत, गल जट्टां वाली और ठोकदा रिहा जो की निंजा और मंक्रीत औलख ने गाया है गाने के टाइटल का नाम गल्लां मिठियां है।

परमिश वर्मा के गाने -


परमिश वर्मा का गाल नी कढ़नी गाना Youtube पर 172 मिलियन से भी अधिक बार देखा जा चुका। Parmish Verma के gaal ni kadhni गाना Speed Records कंपनी का दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला वीडियो बन गया है।

परमिश वर्मा का आ ले चक में आ गया गाना Youtube पर 100 मिलियन बार देखा जा चुका है।

Parmish Verma का ले चक में आ गया सांग -



Parmish Verma का गाल नी कढ़नी सांग -




दोस्तों कैसी लगी आपको परमिश वर्मा की बायोग्राफी, हमे कमेंट में जरूर बताएं ओर अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।

 

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